1. हर मुस्कान मोहब्बत की निशानी नहीं होती।
अगर वो हर बात में मुस्कुरा देती है तो दिल में बेवजह वहम मत पालना कई चेहरे लहजे से कुर्बत का एहसास जगा देते हैं मगर हर मुस्कान वफा की दलील नहीं होती।
2. गरीबी मंज़ूर है, ज़मीर का सौदा नहीं।
मैं गरीब जरूर हूं मगर अपना जमीर बेचता नहीं हूं हालात चाहे जैसे भी हो अपने वसूलों का सौदा करता नहीं है।
3. वफ़ा हमारी फ़ितरत है, बेईमानी नहीं।
बेइमानिया उसकी नजर में होगी हमारी फितरत में नहीं हमने हर रिश्ता वफा से निभाया सौदेबाजी से नहीं।
4. दिल का आख़िरी फ़ैसला।
मेरे दिल का आखिरी फैसला है अब तेरा जिक्र नहीं होगा जिस रिश्ते में कद्र ना हो वहां फिर कभी सफल नहीं होगा।
5. मीठी बातों के पीछे छिपा फ़रेब।
उसकी बातों में मत आना वो फितरत से तमाशागर है लहजे में शहद घोलकर दिलों को बेकरार करती है तुम जैसे आशिक उसके लिए नई दास्तां नहीं है वो हर रोज किसी ने दिल को मोहब्बत का वहम देती है।
6. लफ़्ज़ों की मोहब्बत का सच।
बस उसकी मीठी-मीठी बातें हैं बाकी हर एहसास फरेब निकला जिसे हमने इश्क का नाम दे दिया वो महज़ लफ्जों का तकल्लुफ निकला।
7. अपनी मोहब्बत से मुझे सँवार दो।
मुझे अपनी आदतों में ढालकर अपनी जिंदगी का हिस्सा बना दोगी क्या इस बिखरे हुए मुसाफिर को अपनी मोहब्बत से संवार दोगी क्या।
8. वक़्त ने अपनों की पहचान करा दी।
जब मुकद्दर ने साथ छोड़ा तो अपनों ने रुख मोड़ लिया जिन पर सबसे ज्यादा एतबार था उन्होंने रिश्ता तोड़ दिया वक्त की गर्द ने सबके असली चेहरे दिखा दिए हमने जिन्हें अपना कहा उन्होंने तन्हा छोड़ दिया।
9. मेरे दर्द को तमाशा बनाती रही।
वो मेरी ख्वाहिशों को दफन करके मुस्कुराती रही मेरे जख्मों पर बेपरवाही से तबस्सुम सजाती रही हम हर दर्द को मोहब्बत का इंतहा समझते रहे वो महज़ हर आह को अपनी महफिल का तमाशा बनती रही।
10. सीरत से बढ़कर कोई हुस्न नहीं।
वो हसीन नहीं है हुस्न का दिखावा किया करती है तबस्सुम की ओट में अपना भ्रम छुपाया करती है असल खूबसूरती तो सीरत की रौनक से निखरती है वो आईने से नहीं बनावट से अपना वजूद सावरा करती है।
11. हर तबस्सुम इश्क़ का पैग़ाम नहीं होता।
कुछ पल नजरों की शरारत को इश्क मत समझ लेना हर तबस्सुम दिल की मोहब्बत का पैगाम नहीं होता कई मुलाकाते महज वक्त की रवानी में गुजर जाती है हर जज्बा उम्र भर निभाने के काबिल नहीं होता।
12. वफ़ा के वहम में गुज़री ज़िंदगी।
उसकी वफ़ा के वहम में उम्र गुजार बैठे हैं हम इश्क की जंजीरों में आज भी कैद बैठे हैं हम वो वक्त के साथ अपना हर वादा बदल गए अपनी मोहब्बत की रिवायत पर अभी अडिग बैठे हैं हम।
13. मेरी ख़्वाहिशों का आख़िरी फ़ैसला।
तुम्हारी शिकायतों पर अमल होगा बेशक अब मेरी ख्वाहिशों का कत्ल होगा अगर तुम्हारी मुस्कुराहट की यही शर्त है तो अब हर दर्द का फैसला भी मंजूर होगा।
14. मुस्कुराकर दिल तोड़ने वाली।
वो दिल तोड़ती रही बड़े प्यार से मुस्कुरा देती थी हर वार के बाद उसे वफा का खुदा समझते रहे हम वो छोड़ गई बड़े अदब के साथ।
15. मेरी वफ़ा पर सवाल उठाने वाली।
मुझे हद से ज्यादा सताने लगी है हर महफिल में गुनहगार बताने लगी है जिसे अपनी रूह से बढ़कर चाहा था मैंने वही आज मेरी वफा पर सवाल उठाने लगी है।
16. मोहब्बत नहीं, सच्ची वफ़ा हमारी पहचान है।
मोहब्बत का दिखावा हम नहीं करते इश्क की गलियों में तमाशा हम नहीं करते वफा हमारी फितरत है रिवायत नहीं हर किसी पर दिल लूटाने का इरादा हम नहीं रखते।

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